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Poem

आवाज बेटी की


About this Piece

निखत निसार की यह मर्मस्पर्शी कविता एक अजन्मी बेटी की अपनी माँ से की गई पुकार है। वह अपनी हत्या के पीछे का कारण पूछती है और दुनिया देखने के अपने सपनों का जिक्र करती है。 अंत में, वह समाज के डर के बावजूद अपनी माँ को माफ कर देती है।

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