Poem
मुझे समझाया गया
About this Piece
यह कविता 'मुझे समझाया गया' समाज द्वारा स्त्रियों पर थोपी गई बंदिशों और "संस्कारों" के नाम पर उनके दमन को दर्शाती है。 इसमें बताया गया है कि कैसे एक लड़की को चुप रहना, सहना और अपनी पहचान खोना सिखाया जाता है。 अंततः, यह कविता समाज की इन रूढ़िवादी बेड़ियों को तोड़ने का आह्वान करती है。