Poem
बेटी
About this Piece
यह कविता समाज द्वारा बेटियों पर थोपी गई बंदिशों को उजागर करती है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे "बेटी" होने के नाम पर उसके स्कूल जाने के सपने छीनकर उसे घर की दहलीज तक सीमित कर दिया जाता है और उसका बचपन छीन लिया जाता है।