Poem
उड़ान: बेड़ियों से परे
About this Piece
यह कविता, "उड़ान: बेड़ियों से परे", सामाजिक बंधनों और रूढ़ियों को तोड़कर अपनी पहचान बनाने वाली एक महिला के साहस को दर्शाती है। इसमें डर और बाधाओं को पीछे छोड़कर, संघर्षों का सामना करते हुए निरंतर आगे बढ़ने के अटूट जुनून और स्वतंत्रता की कहानी कही गई है।