Poem
अधिकार
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संदीप नंद की यह व्यंग्य कविता समाज में महिलाओं के "अधिकारों" के खोखलेपन पर प्रहार करती है। इसमें दहेज, सती और उत्पीड़न जैसी कुरीतियों को कटाक्ष के रूप में महिलाओं का अधिकार बताया गया है। लेखक कागजों पर सीमित महिला सशक्तिकरण और समाज की संकीर्ण सोच पर सवाल उठाते हैं।